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स्फटिक शिला

इस मनोरम स्थल की पहचान दो बड़ी चट्टाने हैं।

माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां बैठ कर भगवान राम और सीताजी ने चित्रकूट के अप्रतिम सौंदर्य का आनंद लिया था।