• दशाश्वमेध घाट

दशाश्वमेध घाट

धार्मिक-सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से यह काशी के सार्वाधिक प्रसिद्ध घाटों में अग्रणी है। पुराणों में इस घाट का नाम रूद्रसर (काशीखण्ड) मिलता है। परम्परानुसार ब्रम्हा द्वारा दश अश्वमेध यज्ञ करने के बाद से इसका नाम दशाश्वमेध हुआ। घाट के नामकरण के सन्दर्भ में काशी प्रसाद जायसवाल का मत है कि दूसरी शती ई0 में भारशिव राजाओं ने कुषाणों को परास्त करने के पश्चात अपने आराध्य देव शिव की निवासस्थली काशी में गंगातट के इसी भाग पर दश अश्रवमेध यज्ञ किये थे जिससे घाट का नाम दशाश्वमेध हुआ। मत्स्यपुराण में काशी के पांच प्रमुख तीर्थो में भी इसका उल्लेख है किन्तु यहां इसे दशाश्वमेध नाम से सम्बन्धित किया गया है।

घाट का पक्का निर्माण बाजीराव पेशवा (1735 ई0) ने कराया था। दैनिक एवं पर्व विशेष पर गंगा स्नान करने वाले की सर्वाधिक भीड़ इसी घाट पर होती है। प्रतिदिन सांय 6 बजे से 7 बजे तक (ग्रीष्म एवं शीतकालीन/सूर्यास्त के समयानुसार) भव्य गंगा आरती की जाती है, जो पर्यटको के आकर्षण का केन्द्र बिन्दु है। विशेष पर्वो पर महाआरती का आयोजन किया जाता है।