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दरगाह-ए-साबरी,

दरगाह-ए-साबरी, उन्नाव के प्रख्यात सूफी संत हजरत ख्वाजा सूफी सबीर मोहम्मद ज़कारिया शाह हसनी (आर ए) की जन्म स्थली है। इसका सूफी दर्शन के तीर्थस्थानों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह पावन स्थान उन्नाव जिले के हिलौली ब्लाक के मुसंदी शरीफ में सबीर नगर में स्थित है, और लखनऊ से लगभग 35 किमी दूर है।

हजरत ख्वाजा सूफी सबीर मोहम्मद ज़कारिया शाह हसनी (आर ए) एक जाने माने सूफी संत थे जिन्होंने अपना जीवन प्रेम, एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने में बिताया। वे इस उद्देश्य में अजमेर के प्रख्यात संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के बताये रास्ते पर चले, जिन्हें भारत में सूफी दर्शन का जनक माना जाता है। इन्होने समाज में सामुदायिक सद्भाव बनाये रखने के लिए शांति का सन्देश प्रचारित किया। आज देश ही नहीं अपितु विदेश से भी हर जाति और संप्रदाय के लोग इनके अनुयायी हैं।

हजरत ख्वाजा सूफी सबीर मोहम्मद ज़कारिया शाह हसनी (आर ए) की मज़ार मुसंदी शरीफ में स्थित है और वर्तमान में हजरत ख्वाजा सूफी मोहम्मद जुनैद शाह साबरी यहाँ के सज्जादा नशीन हैं।

इस गाँव में हर वर्ष इस्लामिक कैलेंडर के शबानुल मौज्ज़म महीने की 21वीं से 24वीं तारीख तक एक सालाना उर्स होता है। इसमें देश विदेश से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। चार दिन के इस आयोजन में कई आकर्षक और श्रद्धा से परिपूर्ण कार्यक्रम होते हैं जिनमे सूफी क़व्वाली, अखिल भारतीय नात और मुशायरा, कीरत प्रतियोगिता, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। सभी आगंतुक श्रद्धालुओं के लिए भोजन का प्रबंध किया जाता है।

साबरी फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े निःशुल्क मेडिकल चेक-अप कैंप और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इसके अतिरिक्त, निशक्तजनों को निशुल्क दवा वितरण और जरूरत की अन्य चीजें भी निशुल्क वितरित की जाती हैं।