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बड़ा इमामबाड़ा

इसका निर्माण नवाब आसफ़-उद-दौला ने 1786-91 में कराया था।

वास्तुशिल्प के लिहाज़ से उस दौर की यह शानदार इमारतों में एक हुआ करती थी। कहते हैं इसका सेंट्रल हॉल दुनिया में सबसे बड़ा गुम्बदाकार छत वाला हॉल है। इसकी आंतरिक साज-सज्जा में सिर्फ गलियारों को छोड़ दें तो और कहीं भी लकड़ी का इस्तेमाल नहीं हुआ है। अब इसका इस्तेमाल शिया मुसलमान अज़ादारी के लिए करते हैं।

इसका निर्माण क्यों हुआ इसके पीछे भी एक रोचक प्रसंग है। कहते हैं कि 1785 में अवध में ज़बर्दस्त अकाल पड़ा। ऐसे में लोगों को रोजगार देने के लिए ही इस भव्य इमारत का निर्माण 1785 में शुरू किया गया था।

इसके नीचे कई भूमिगत रास्ते हैं, जिन्हें अब बंद कर दिया गया है। बाहर से आती सीढ़ियां लोगों को भूल- भुलैया तक लेकर जाती हैं। यह टेढ़े-मेढ़े रास्तों का ऐसा मायाजाल है कि लोग यहां रास्ता भटक जाते हैं। संभवतः इसी कारण पर्यटकों को गाइड के साथ ही यहां जाने की हिदायत दी जाती है। इमामबाड़ा के प्रांगण में ही है बेहद सुंदर आसफ़ी मस्जिद। शाही बावड़ी यहां का एक और आकर्षण है।

समय : सूर्योदय से सूर्यास्त तक

प्रवेश शुल्क: रु : 25.00 (भारतीय) 500.00 (विदेशी पर्यटकों के लिए ) (जिसमें बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, पिक्चर गैलरी, शाही हमाम को सम्मिलित किया गया है। )