• आदिकेशव घाट

आदिकेशव घाट

यह घाट गंगातट पर स्थित पांच प्रमुख तीर्थो या घाटों में एक है जिसका उल्लेख मत्स्यपुराण में हुआ है। इसे काशी काशी का प्रथम एवं प्रमुख विष्णुतीर्थ भी माना जाता है। इस घाट के सन्दर्भ में उल्लेख मिलता है कि शिव के आदेश से विष्णु गरूड़ पर आरूढ़ होकर जब प्रथमतः काशी आये तो सर्वप्रथम चरण इसी स्थान पर पडे़। उल्लेखनीय है कि जिस स्थान पर विष्णु ने सर्वप्रथम चरण रखा तथा गंगा में धोया उसे ही पदोदक तीर्थ माना गया। ऐसी मान्यता है कि घाट पर विष्णु ने अपनी मूर्ति स्वंय स्थापित की थी। आदिकेशवघाट का सर्वाधिक महत्व गहड़वाल काल में था। गहड़वाल शासक प्रायः इस घाट पर स्नान के पश्चात ब्राम्हणों को स्वर्ण, भूमि तथा अन्य दान करते थे। गहड़वाल शासक चन्द्रदेव, मदनपाल, गोविन्दचन्द्र एवं जयचन्द्र के अनेक दानपत्र प्राप्त हुए हैं जिनमें आदिकेशवघाट पर स्नान के बाद दान करने तथा अनेक संस्कारों (मुण्डन, उपनयन तथा नामकरण) के सम्पन्न होने का उल्लेख है। घाट पर आदिकेशव के अतिरिक्त ज्ञानकेशव, संगमेश्वर, पंचदेवता, विनाक तथा दो अन्य शिव मंदिर है।