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फतेहपुर सीकरी

अपनी जिंदगी की 28 उम्र तक पहुंचने तक बादशाह अकबर ने इंडो-इस्लामिक वास्तुकला में फतेहपुर सीकरी नामक शहर की स्थापना की, जिसे आज से चार शाताब्दी पूर्व आगरा के पश्चिम में 37 किमी की दूरी पर बसाया गया था। इस शहर की स्थापना की योजना काफी तेजी से शुरु हुई थी, पर एक दशक के बाद इसे रोक दिया गया।

सन् 1568 तक अकबर ने अपने साम्राज्य को और विशाल बना लिया था, पर उसे बस इसी बात का अफसोस था कि उसका कोई पुत्र (उत्तराधिकारी) नहीं था। उसकी यही कामना उसे सीकरी गांव में रहने वाले सूफी, संत सलीम चिश्ती के पास तक ले आई। उस सूफी ने अकबर को वरदान दिया और जल्द ही अकबर के घर राजकुमार सलीम (जो आगे चलकर बादशाह जहांगीर हुआ) का जन्म हुआ। उस सूफी का शुक्रिया अदा करने के लिए बादशाह अकबर ने सीकरी में ही , आगरा की संयुक्त राजधानी के तौर पर, एक शाही निवास बनवाने का निर्णय लिया। अकबर ने इस नए बसाए हुए शहर का नाम फतेहपुर सीकरी रखा। अकबर द्वारा निर्मित फ़तेहपुर सीकरी इस वास्तुकला की खूबसूरती और अद्भुतता को दर्शाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसकी वास्तुकला को देखते हुए यह लगता है कि, इसे काफी गणितीय आधार पर बनाया गया होगा।

जामा मस्जिद के निर्माण ने इस शहर की खूबसूरती को और भी बढ़ा दिया।

आज भी लाल बलुई पत्थर की वास्तुकला, विभिन्न प्रकार की नक्काशी और इसकी सजावट पूर्णतः संरक्षित है।