• भगवान बाहुबलि मंदिर

भगवान बाहुबलि मंदिर

जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थांकर भगवान रिषभ देव के पुत्र भगवान बाहुबलि को जैन धर्म में विशेष महत्ता प्राप्त है।

भगवान बाहुबलि अपने भाई "भरत" के साथ हुये अहिंसक विवाद में जीत प्राप्त करने के उपरान्त निर्वाण की इच्छा जताते हुये जैन भिक्षु बन गये। तत्पश्चात "क्योत्सर्ग" मुद्रा में वर्ष भर अनवरत तपस्या की। कालान्तर में उन्हें "केवलज्ञान" प्राप्त हुआ और "अरिहन्त" को प्राप्त हुये।

जैन धर्म ग्रन्थों के अनुसार भगवान बाहुबलि को मोक्ष्य एवं सि‍द्धि प्राप्त हुई।

सुहाग नगरी फिरोजाबाद के गौरव केन्द्र "जैन नगर" में प्रतिष्ठित बाहुबली स्वामी की यह विशाल प्रतिमा उदारमना स्व0 सेठ छदामीलाल जी द्वारा स्थापित भव्य मन्दिर के विशाल परिसर में विराजमान भागवान बाहुबली की मूर्ति उत्तर भारत में सबसे बड़ी है। इस मूर्ति का आकार 45 x 12 फुट है तथा वजन साढे तीन हजार मन से कुछ अधिक ही है। यह बुदंकीदार ग्रेनाइट पत्थर की बनी है।

भगवान बाहुबली मन्दिर के अलावा भी फिरोजाबाद में कई महत्वपूर्ण जैन धर्म स्थल संचालित हैं। इसके अलावा चूड़ी उद्योग तथा शीशा उद्योग के लिये भी फिरोजाबाद पूरे देश में पहचाना जाता है।