तुलसी मानस मंदिर
"यह वाराणसी रेलवे स्टेशन से 7 किमी दूर स्थित है और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित राम चरित मानस को समर्पित है। कहा जाता है कि यह महाकाव्य यहीं लिखा गया था। अन्य मंदिरों की भीड़-भाड़ से दूर इस मंदिर का शांत वातावरण एक अलग प्रभाव डालता है। इस मंदिर की दीवारें राम चरित मानस के छंदों से सजी हैं।"

 

 

वाराणसी मंदिरों, घाटों, कुंडों एवं गलियों का शहर है। पवित्र गंगा के तट पर शानदार लंबी घाटों की श्रृंखला एक आकर्षक नज़ारा है। यहाँ सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है जो पर्वों पर और भी बढ़ जाता है। यहाँ हज़ारों श्रद्धालु शास्त्रविधि अपनाने साल भर आते हैं। वास्तव में, यहाँ आप जीवन के व्यापक दृष्टिकोण का अनुभव कर सकते हैं।

तुलसी मानस मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर के समीप स्थित है और यह भगवान राम को समर्पित है। यह मंदिर उसी स्थान पर स्थापित है जहाँ गोस्वामी तुलसीदास जी रहा करते थे और जहाँ उन्होने महाकाव्य श्री रामचरितमानस लिखी। रामचरितमानस के श्लोक आज भी इस मंदिर की दीवारों पर उकेरे हुए हैं। साथ ही, यहाँ एक संग्रहालय भी है जहाँ रामायण की पांडुलिपियों का दुर्लभ संग्रह है।

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अंतिम नवीनीकृत तिथि : मंगलवार, Jan 29 2019 11:17AM