बटेश्वर मेला – 2015

(पशु मेला जानें के लिए सबसे उपयुक्त समय 7 नवंबर - 14 नवंबर 2015)

(धार्मिक मेला जानें के लिए सबसे उपयुक्त समय 21 नवंबर – 28 नवंबर 2015)

"बटेश्वर, एक प्राचीन मंदिर होने के साथ ही हिन्दुओं का महत्वपूर्ण दार्शनिक और संस्कृति केंद्र भी है। यह ताज की नगरी आगरा और इटावा के बीच, तथा आगरा से 70 किमी दूर स्थित है।"

इस स्थान का नाम इस क्षेत्र के पूजनीय अग्रणी देवता बटेश्वर महादेव (भगवान शिव का ही दूसरा नाम) पर पड़ा है। इस मंदिर के संकुल में 100 से अधिक भगवान शिव को समर्पित मंदिर हैं। यह सभी मंदिर साथ में बह रही यमुना नदी के किनारे अर्द्ध चन्द्र के आकार में एक कतार में स्थित हैं और कई मंदिरों में घाट भी हैं जो सीढ़ियों से नदी तक जाते हैं। यह स्थान भगवान कृष्ण की माता का जन्मस्थान के रूप में भी जाना जाता है। बटेश्वर से जुड़ीं हुई बहुत सी दंतकथायें प्रचलित है। बहुत से प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख राजा सूरजसेन के नाम पर सूरजपुर के नाम से पाया जाता है। वह भगवान कृष्ण के बाबा थे और उन्होंने ही इस जगह को बसाया था।

बटेश्वर हिन्दुओं के लिए तीर्थयात्रा का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। इसे सभी धामों के पुत्र के रूप में भी जाना जाता है और चारों धाम (उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारिका और पूर्व में जगन्नाथपुरी) की यात्रा के बाद यहाँ आना आवश्यक माना जाता है।

बटेश्वर 22वें जैन तीर्थंकर नेमिचंद का जन्मस्थान है और यह जैन धर्म की दोनों शाखाओं श्वेताम्बर और दिगम्बर के लिए महत्वपूर्ण और पूजनीय तीर्थस्थल है। तीर्थंकर को समर्पित बहुत से सुंदर और कलात्मक रूप से तराशे हुए जैन मंदिर यहाँ और यहाँ से 3 किमी किलोमीटर दूर शोरिपुर में स्थित हैं।

बटेश्वर मवेशी/ पशु मेला

(पशु मेला जाने के लिए सबसे उपयुक्त समय 7 नवंबर - 14 नवंबर 2015)

बटेश्वर में हर साल एक बहुत विशाल मवेशी मेला आयोजित किया जाता है। यह मेला हिन्दू कैलेंडर की तिथियों पर आयोजित होता है और हर वर्ष इसकी तिथियाँ बदल सकती हैं। इसका आयोजन बटेश्वर में पूजा करने के सबसे महत्त्वपूर्ण तिथियों के अनुरूप होता है, और यह साधु, संत, व्यापारी, ग्रामीणों और अन्य लोगों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पर्व है। यहाँ बड़ी संख्या में ऊँट, घोड़े, बैल, हाथी, बकरियां और अन्य मवेशी बेचने और खरीदने के लिए लाये जाते हैं। साथ ही व्यापारी यहाँ बर्तन, मसाले, लकड़ी के सामान, स्थानीय निर्मित फर्नीचर, हस्तशिल्प और घरेलू उपयोग का सामान बेचने के लिए दूकानें लगाते हैं।

यह मेला स्थानीय ग्रामीण जीवन का एक बहुरंगी और जीवंत दृश्य प्रस्तुत करता है जिसमे किसी भी प्रकार का बनावटीपन नहीं होता। बटेश्वर मेला उत्तर भारत के सबसे विशाल मेलों में से एक है और भव्यता में इसकी तुलना राजस्थान में लगने वाले पुष्कर मेले से की जाती है। आमतौर पर इस मेले का आयोजन दीपों के पर्व दीपावली के कुछ दिन पहले शुरू होता है और लगभग तीन सप्ताह तक चलता है। पहले सप्ताह में यहाँ पशुओं और मवेशियों का मेला लगता है और इसके बाद ऊँट और घोड़े लाये जाते हैं और अंत में गधे, खच्चर और बकरियां लाये जाते हैं। मेले के अंतिम सप्ताह में ग्रामीण मेला शुरू होता है जिसमे तमाम तरह की दुकानें, बच्चों के खेलने के झूले आदि लगते हैं। इसी के साथ मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन भी होते हैं।


कैसे पहुंचें

कैसे पहुंचें

आगरा पहुंचने के बाद, वहां से बाहर की ओर जाने वाले मार्ग पर लगभग 70 किमी आगे, फरेरा तिराहे से बायीं ओर मुड़ जाएं और लगभग 7 किमी चलने के बाद आप बटेश्वर पहुँच जायेंगे।

कहाँ ठहरें

कहाँ ठहरें

  • राही टूरिस्ट काम्प्लेक्स (बजट क्लास), बटेश्वर (यू.पी.एस.टी.डी.सी. की इकाई), फ़ोन न 0562-2850120, 2851720
  • चंबल सफारी लॉज, निजी हेरिटेज सम्पति (लक्ज़री श्रेणी में), बटेश्वर से 10 किमी दूर, संपर्क 09997066002, www.chambalsafari.com
  • कई और अलग-अलग श्रेणियों के आरामदायक होटल आगरा में उपलब्ध हैं।

दर्शनीय स्थल

दर्शनीय स्थल

चंबल अभयारण्य (बटेश्वर से केवल 10 किमी दूर): यहाँ चंबल घाटी के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को करीब से देखने का एक मनोहारी मौका मिलता है। यहाँ लगभग 600 वर्ग किमी के क्षेत्र को राष्ट्रीय चंबल सैंक्चुअरी घोषित किया गया है और यह एक संरक्षित वन्य क्षेत्र है। वर्तमान मे यहाँ मे 242 निवासी और अप्रवासी पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती है, दलदल में रहने वाले मगर, घड़ियाल, कछुओं की आठ प्रजातियाँ और गैंगेटिक डॉल्फिन भी देखी जा सकती हैं।

आने वाली सर्दियों में इस प्रदेश की अनमोल धरोहर, सांस्कृतिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक, वन्य क्षेत्र और भी बहुत कुछ यादगार अनुभव करीब से देखें और अपनी छुट्टियों को यादगार बनायें।

अधिक जानकारी के लिये संपर्क करे :- उत्तर प्रदेश पर्यटन, 64, ताज रोड, आगरा, फोन 091-562-2226431, 2421204
ई-मेल :- agrauptourism@gmail.com
वेबसाइट :- www.uptourism.gov.in, www.tajmahal.gov.in

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अंतिम नवीनीकृत तिथि : सोमवार, Jan 28 2019 5:24PM