बरसाना
"यह गोवर्धन से 21 किमी उत्तर में है और राधा की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। "

यह एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है और मथुरा से यहां के लिए दैनिक बस सेवा उपलब्ध है। मूल रूप से ब्रहमसरण के रूप में जाना जाने वाला बरसाना एक पहाड़ी की ढलान पर स्थित है। पहाड़ी की चार प्रमुख चोटियां दिव्यता का प्रतीक मानी जाती हैं और उन पर लाडली जी का मंदिर है। बरसाना में देखे जाने योग्य स्थान हैं:

श्रीजी मंदिर: लाड़ली लाल के रूप में भी जानी जाने वाली देवी श्रीजी के मंदिर को आज से 5000 वर्ष पहले वज्रनाभ द्वारा स्थापित किया गया था।

मान मंदिर: कहा जाता है, जब राधा नाराज़ होती थीं तब एकांत पाने के लिए यहां आती थीं। राधा को खुश करने के लिए कृष्ण रोते और विनती करते थें। मंदिर के अंदर एक छोटी सुरंग अंधेरी कोठरी तक जाती है, कहा जाता है कि यही वो जगह है जहां राधा जी जाकर बैठ जाती थीं।

मोर कुटीर: मोर कुटीर वह जगह है जहां कृष्ण और राधा मोर और मोरनी के रूप में नृत्य किया करते थे।

कृष्ण कुंड या राधा सरोवर: यह जंगलों व गुफाओं के मध्य वह कुंड है जहां राधा स्नान किया करती थीं। साथ ही राधा-कृष्ण यहां जलक्रीड़ा भी करते रहे होंगे |

संकरी खोड़: यह ब्रह्मा पर्वत और विष्णु पर्वत के संधिस्थल पर एक बहुत संकरा रास्ता है। कृष्ण और ग्वाल गोपाल, कर संग्राहक की वेशभूषा में राधारानी और उनकी सखियों का रास्ता रोक लेते थे और संकरी खोड़ से जाने के लिए दही, मक्खन और घी की मांग करते थें।

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अंतिम नवीनीकृत तिथि : गुरुवार, Jan 24 2019 6:01PM